Sunday, January 12, 2020

इतना तो करना स्वामी! विष्णु भजन.

                  इतना तो करना स्वामी! 
 इतना तो करना स्वामी! जब प्रण तनसे निकले।
गोविंद नाम लेकर फिर प्रण तनसे निकले।। 1।।
श्री गंगाजीका तट हो, यमुनाका वंशी-वट हो।
मेरा साँवरा निकट हो, जब प्रण तनसे निकले।। 2।।
श्री वृन्दावनका स्थल हो, मेरे मुखमे तुलसी-दल हो।
विष्णू-चरणका जल हो, जब प्रण तनसे निकले ।।3।।
सन्मुख साँवरा खडा हो, मुरलीका स्वर भरा हो।
 तिरछा चरण धरा हो, जब प्रण तनसे निकले ।।4।।

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