Saturday, March 28, 2020

श्रीराम ची आरती-मराठीत


श्रीराम ची आरती-मराठीत


                भाग-१

        श्रीराम जय राम जय जय राम। 
        आरती ओवाळून पाहु सुंदर मेघश्याम।। धृ।। 
         दशरथनंदन कौसल्या सुत। 
         राज्य अभिषेक होतो बहु थाटात।। १।।
         कनकाचे ताट करी धनुष्यबाण। 
         मारुती हा पुढे उभा हात जोडुन।। २।।
         भरत शत्रुघ्न दोघे चामरें ढाळिती। 
        सिंहासनी आरुढले जानकी पती।। ३।।
        विष्णूदास नामा म्हणे मागणे हेची। 
       अखंडीत सेवा घडो राम चरणांची।। ४।।
         
         

                   भाग-२


      त्रिभुवनमंडितमाळ शोभतसे गळां ।
     आरती ओवाळूं पाहूं ब्रम्हपुतळा।। १।।
     श्रीराम जय राम जय जय राम।। 
     आरती ओवाळूं पाहुं सुंदर मेघश्याम।। धृ ।।
     ठकाराचें ठाण क्रीं धनुष्यबाण। 
     मारुती सन्मुख उभा कर जोडून।। २।।
    भरत शत्रुघ्न दोघे चामरें ढाळिती ।
    स्वर्गीहून देव पुष्पवृष्टी करिती।। ३।।
     रत्नखचित माणिक वर्णू काय मुकुटीं।
    आरती ओवाळूं चवदा भुवनांचे पोटीं।। ४।।
     विष्णूदास नामा म्हणे मागतों तूतें।।
     आरती ओवाळूं पाहू सीतापतीतें।। ५।।



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